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Sunday, July 5, 2015

डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा विकसित ''शिक्षकों के लिए शपथ''

शिक्षक मित्रों, भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान विचारक व वैज्ञानिक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा शिक्षकों के लिए एक शपथ का विकास किया गया है जिसका हिंदी अनुवाद करने का प्रयास किया है। हो सकता है कि हिंदी अनुवाद में कुछ कमी रही हो, कृपया इस कमी को ध्यान में लाएं ताकि इसे और परिशुद्ध किया जा सकें। कलाम साहब की भावना है कि सभी शिक्षक इस शपथ को ग्रहण करें तथा तदनुरूप अपने जीवन में परिवर्तन लाएं।

शिक्षकों के लिए शपथ

1. सबसे पहले, मैं शिक्षण से प्रेम करूँगा/करूंगी। शिक्षण मेरी आत्मा होगी।
2. मैं महसूस करता/करती हूँ कि मैं न सिर्फ छात्रों को अपितु प्रज्वलित युवाओं को आकार देने के लिए जिम्मेदार हूँ,  जो पृथ्वी के नीचे, पृथ्वी पर और पृथ्वी के ऊपर सबसे शक्तिशाली संसाधन हैं। मैं शिक्षण के महान मिशन के लिए सम्पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हो जाऊंगा/जाऊंगी।
3. मैं स्वयं को एक महान शिक्षक बनाने के लिए विचार करूंगा/करूंगी,जिससे मैं अपने विशिष्ट शिक्षण के माध्यम से औसत स्तर के बालक का उत्थान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए कर सकता/सकती हूँ।
4. विद्यार्थियों के साथ मेरा कार्य-व्यवहार एक माँ, बहन, पिता या भाई की तरह दयावान और स्नेहपूर्ण रहेगा।
5. मैं अपने जीवन को इस प्रकार से संगठित एवं व्यवहृत करूँगा/करूँगी कि मेरा जीवन स्वयं ही मेरे विद्यार्थियों के लिए एक संदेश बने।
6. मैं अपने विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने तथा उनमें जिज्ञासा की भावना को विकसित करने को प्रोत्साहित करूंगा/करूँगी, ताकि वे रचनात्मक प्रबुद्ध नागरिक के रूप में विकसित हो सके।
7. मैं सभी विद्यार्थियों से एकसमान व्यवहार करूंगा/करूँगी तथा धर्म, समुदाय या भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का समर्थन नहीं करूंगा/करूँगी।
 8. मैं लगातार अपने शिक्षण में क्षमता का निर्माण करूँगा/करूँगी ताकि मैं अपने छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान कर सकूं।
9. मैं अत्यंत आनन्द के साथ अपने छात्रों की सफलता का जश्न मनाऊँगा/मनाऊँगी।
10. एक शिक्षक होने के नाते मैं अहसास करता/करती हूँ कि राष्ट्रीय विकास के लिए की जा रही सभी पहल में मैं एक महत्वपूर्ण योगदान कर रहा/रही हूँ।
11. मैं लगातार मेरे मन को महान विचारों से भरने तथा चिंतन व कार्य व्यवहार में सौम्यता का प्रसार करने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
12. हमारा राष्ट्रीय ध्वज मेरे ह्रदय में फहराता है तथा मैं अपने देश के लिए यश लाऊँगा/लाऊँगी।

Oath for Teachers

1. First and foremost, I will love teaching. Teaching will be my soul.
2. I realize that I am responsible for shaping not just students but ignited youths who are the most powerful resource under the earth, on the earth and above the earth. I will be fully committed for the great mission of teaching.
3. I will consider myself to be a great teacher for I can lift the average to the best performance by way of my special teaching.
4. All my actions with my students will be with kindness and affection like a mother, sister, father or brother.
5. I will organize and conduct my life, in such a way that my life itself is a message for my students.
6. I will encourage my students to ask questions and develop the spirit of enquiry, so that they blossom into creative enlightened citizens.
7. I will treat all the students equally and will not support any differentiation on account of religion, community or language.
8. I will continuously build the capacities in teaching so that I can impart quality education to my students.
9. I will celebrate the success of my students, with great joy.
10. I realize by being a teacher, I am making an important contribution to all the national development initiatives.
11. I will constantly Endeavour to fill my mind, with great thoughts and spread the nobility in thinking and action.
12 My national flag flies in my heart and I will bring glory to my nation

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