Total Pageviews

Monday, April 27, 2015

विज्ञान कविता 'विज्ञान शिक्षक' - (विज्ञान प्रगति से साभार)

लेखक- श्री अनिल कुमार मिश्र



(मित्रों विज्ञान प्रगति पत्रिका में विज्ञान शिक्षक के गुणों एवं विशेषताओं पर ये बहुत ही अच्छी कविता पढ़ी।  आप सभी से शेयर कर रहा हूँ। विज्ञान अध्यापक श्री अनिल कुमार मिश्र ने विज्ञान शिक्षक के गुणों को बहुत ही उत्कृष्ट ढंग से इस कविता के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। आशा है आपको ये पसंद आएगी। विज्ञान शिक्षक पर इतनी शानदार कविता के लेखन के लिए श्री अनिल कुमार मिश्र जी का ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद .)
शिक्षक हूँ विज्ञान का
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।
सकारात्मक चिंतन का
माहौल बनाता हूँ।
मौसम कैसे बदल रहा है?
सूरज कैसे निकल रहा है?
सूरज का उगना और छिपना,
मैं समझाता हूँ।
जी हाँ शिक्षक हूँ विज्ञान का
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

पानी से ओले का बनना,
ओले से फिर पानी बनना,
पानी से बादल का बनना, 
 बादल का बारिश में बदलना,
डिस्चार्ज बैटरी, चार्ज करना
मैं सिखलाता हूँ।
सीखना बंद, तो जीतना बंद
यह भी समझाता हूँ। .............
शिक्षक हूँ विज्ञान का
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ..

घर्षण से ताप बढ़ाकर।
मैं आग जलाता हूँ।
कैसे बने? यान, राकेट।
जहाज, बस और ठेला।
यही सब समझाने हित
आयोजित करता हूँ, विज्ञान मेला।
विज्ञान प्रयोगों के द्वारा,
विश्वास जगाता हूँ।
शिक्षक हूँ विज्ञान का,
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

पर्वतों की शिलाओं को तोड़ना
नदियों और नालों को मोड़ना
पर्यावरण के हित में,
बुराइयों को छोड़ना
करके दिखलाता हूँ।
शिक्षक हूँ विज्ञान का
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

विज्ञान, ज्ञान है दो भ्राता,
विज्ञान प्रकृति का है ज्ञाता
किन्तु ज्ञान है बड़ा भ्राता,
नियति का भी यही विधाता।
विज्ञान दौड़ना बाहर है।
पर ज्ञान दौड़ता है मन में।
प्रकृति ही प्रयोगशाला है
ये वैज्ञानिकता सिखलाता हूँ।
जी हाँ ... शिक्षक हूँ विज्ञान का,
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

विज्ञान के सूत्र में,
नैतिक मूल्यों की,
माला बनाता हूँ।
जिसे छात्रों को पहनाकर,
मानवता सिखलाता हूँ।
पर्यावरण की प्रथम सुरक्षा,
सबको समझाता हूँ।
शिक्षक हूँ विज्ञान का,
मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

सही दिशा में मेहनत करना,
निंदानीति में रुचि न रखना,
जीवन को उन्नत करने हित,
‘‘मर्दनं गुण वर्धनम’’ का,
मंत्र बताता हूँ।
शिक्षक हूँ विज्ञान का,
मै विज्ञान पढ़ाता हूँ।

कम करो प्रयोग ए.सी. फ्रीज़ का
कम हो उत्पादन सी. एफ. सी. का,
 एक अणु सी. एफ. सी. का,
 क्षय करे लाख अणु O3 के,
 एक पेड़ निर्माण करें नित
 O2 तीन व्यक्तियों के हित,
 पेड़ लगाओ, धरा बचाओ
 सबको समझाता हूँ।
 जी हाँ, शिक्षक हूँ विज्ञान का,
 मैं विज्ञान पढ़ाता हूँ।

लेखक का संपर्क सूत्र:-

श्री अनिल कुमार मिश्र, विज्ञान शिक्षक, राजकीय सर्वोदय बाल विद्यालय कोण्डली दिल्ली-91
मो.: 09911073274, 9891953366, ई-मेल: anilkumarmishra89@gmail.com,

3 comments:

  1. These are in fact fantastic ideas in concerning blogging.
    You have touched some pleasant points here. Any way keep up wrinting.



    Look into my web page ... Diced

    ReplyDelete
  2. बहुत ही ज्ञान बर्धक कविता लिखी चाचा जी ।विज्ञान का सही ज्ञान
    विज्ञानं के प्रेमियो को
    धन्यवाद
    अच्छे मार्ग दर्शन के लिए आभार
    चालू रखनी चाहिए सिखने की कला
    क्योकि ज्ञान ही इन्शान का कर सकता भला
    ज्ञान से से ही सामाजिक चेतना का जागरण होग़ा।
    ज्ञान से ही सजग संसार का अनावरण होगा ।
    अपने ज्ञान से विज्ञानं का कर कर के विश्लेषण।
    आपके मार्गदर्शन में करेंगे शिष्य अन्वेषण।।।
    ÷÷÷÷÷÷÷÷जय बिज्ञान ÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷

    ReplyDelete