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Friday, December 26, 2014

जनसंख्या शिक्षा प्रायोजना

NCERT नई दिल्ली के मार्गदर्शन में United Nations Fund for Populational Activities (UNFPA) के आर्थिक सहयोग से राजस्थान में जनसंख्या शिक्षा प्रायोजना वर्ष 1981 से आरम्भ की गई। वर्तमान में यह योजना राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्, नई दिल्ली के मार्गदर्शन एवं उनसे प्राप्त आर्थिक सहायता से राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा चलाई जा रही है।
वर्ष 1999 में विश्व की जनसंख्या 6 अरब थी तथा जनगणना 2001 के अनुसार भारत की जनसंख्या 1 अरब 2 करोड़ 86 लाख हो गई। राज्य की जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत भाग किशोरों का है। ये बालक ही देश के भविष्य की जनसंख्या को निर्धारित करने वाले होंगें। अतः इन्हें जनसंख्या शिक्षा दिए जाने की आवश्यकता है।
जनसंख्या शिक्षा के सभी मुद्दे मूल्य आधारित हैं। अतः बाल्यकाल में ही जनसंख्या व किशोरावस्था के प्रति सही दृष्टिकोण के विकास का प्रयास इस प्रायोजना द्वारा किया जा रहा हैं। वर्ष 1997 से प्रायोजना में किशोरावस्था शिक्षा, प्रजनन स्वास्थ्य तथा एड्स शिक्षा के कार्यक्रम भी विद्यालयों में आयोजित किए गए। विद्यालयों से बाहर के किशोरों को जनसंख्या एवं किशोरावस्था शिक्षा से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस प्रायोजना अंतर्गत वर्ष 2001 से 2004 तक कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की गई। उसमें भी जनसंख्या शिक्षा से संबंधित सामग्री का समावेश किया गया एवं विद्यालयों में जनसंख्या व विकास शिक्षा कार्यक्रम प्रायोजना के तहत् चलाए जा रहा है।
वित्तीय प्रावधान
भारत सरकार द्वारा एन.सी.ई.आर.टी. के माध्यम से।
जनसंख्या व विकास शिक्षा के प्रमुख क्षेत्र-
प्रायोजना के कार्यक्रमों में विद्यालयी शिक्षा के लिए निम्नांकित क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है-
1. जनसंख्या और स्थिर विकास।
2. लैंगिक समता व समानता और महिला सशक्तीकरण।
3. पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक तत्व और जीवन की गुणवत्ता।
4. प्रजनन स्वास्थ्य एवं यौन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता।
5. जनसंख्या वितरण, शहरीकरण एवं प्रवजन।

उपर्युक्त क्षेत्रों के संदर्भ में ‘‘जीवन कौशल विकास मेला’’ (तरंगोदय) कार्यक्रम भी जोड़ा गया है।

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