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Friday, January 3, 2014

***सिलीकन नेनो क्रिस्टल एलईडी से मल्टीकलर का उत्सर्जन संभव***

बिजली का खर्च कम करने तथा अधिक प्रकाश उत्पन्न करने के लिए घरों व ऑफिस को प्रकाशित करने में काम में आने वाले बल्ब का स्थान पहले ट्यूबलाइट ने लिया फिर सी एफ एल काम में लाई जाने लगी और अब इसके स्थान पर प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एलईडी) की लाइटिंग का प्रयोग होने लगा है। एलईडी बल्ब की विशेषता यह है कि यह बहुत कम डीसी वोल्टेज पर कार्य करते हैं तथा पावर की खपत बहुत कम करते हैं। मिसाल के तौर पर एक 1.4 वाट का एलईडी 25 वाट के बल्ब के बराबर प्रकाश देता है। विभिन्न देशों के वैज्ञानिक और भी अधिक प्रभावी एलईडी का विकास करने में कार्यरत है।
नेनो टेक्नोलॉजी की मदद से अधिक प्रभावी एलईडी बनाने के संबंध में एक नवीन शोध सामने आई है। जर्मनी के प्रौद्योगिकी संस्थान कार्लज़ूए और कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं ने अलग-अलग आकार के सिलिकॉन नेनो क्रिस्टल्स (ncSi) के उपयोग से अधिक प्रभावशाली व लंबे समय तक चलने वाले एलईडी बनाने में सफलता प्राप्त की है। इन डिवाइस में नैनो कणों के आकार को नियंत्रित करके गहरे लाल, पीले, नारंगी आदि रंगों की एक परास उत्सर्जित करने के लिए ट्यून किया जा सकता है। आज उपयोग में लाए जा रहे II-VI क्वांटम डॉट LED की एक बड़ी कमी यह है कि इनमें प्रयुक्त किए जा रहे अधिकतर तत्व जैसे केडमियम, सीरियम, गंधक तथा लेड अत्यधिक विषैले होते हैं जबकि सिलिकन आधारित एलईडी इस मामले में ज्यादा अच्छे हैं। इसके अतिरिक्त "क्वांटम आकार प्रभाव" के उपयोग से इनमें नैनो कणों के आकार को नियंत्रित करके विभिन्न रंगों की एक परास उत्सर्जित करने में ट्यून किया जा सकता है। इस प्रभाव में बड़े आकार के नेनो कणों से लाल प्रकाश का उत्सर्जन होता है तथा आकार छोटा करते जाने पर प्रकाश के रंगों का उत्सर्जन स्पेक्ट्रम के लाल से नीले भाग की ओर होता है।
पहले के साधारण सिलिकन एलईडी से अदृश्य अवरक्त प्रकाश तथा लाल प्रकाश ही निकलता था किंतु इन नए एलईडी से लाल से पीले नारंगी क्षेत्र में प्रकाश उत्सर्जित किया जा सकता है। यह आशा की जा रही है कि ज्यादा लंबी जीवन अवधि होने से ये नेनो क्रिस्टल एलईडी लाईटिंग टेक्नोलॉजी में अधिक उपयोगी सिद्ध होंगे।

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