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Friday, January 3, 2014

हाइड्रॉजन के प्रतिकण एंटीहाइड्रॉजन का अस्तित्व


*** क्या हाइड्रॉजन के प्रतिकण एंटीहाइड्रॉजन का अस्तित्व है? ***

क्या द्रव्य के विपरीत एक प्रतिद्रव्य भी होता है?
तो इसका उत्तर है- हाँ।

ब्रह्मांड की उत्पत्ति के महाविस्फोट (The big bang) सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का निर्माण एक अत्यंत घनीभूत पिंड के महाविस्फोट के फलस्वरूप हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड में सर्वप्रथम महाविस्फोट के बाद समान मात्रा में द्रव्य या पदार्थ (matter) तथा प्रतिद्रव्य या प्रतिपदार्थ (antimatter) का निर्माण हुआ। परंतु आज सभी वस्तुओं जो पृथ्वी और अन्य पिंडो पर हैं, वे लगभग सभी द्रव्य से निर्मित है। आज इसकी तुलना में प्रतिद्रव्य बहुत कम मात्रा में मिलता है। वैज्ञानिक सोचते हैं कि इस ब्रह्मांड के संतुलन के लिए कुछ तो अवश्य हुआ होगा।

किसी द्रव्य कण के प्रतिकण का द्रव्यमान द्रव्य कण के समान होता है किंतु इसका आवेश इसके विपरीत होता है।
उदाहरण के लिए इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण पॉजिट्रॉन होता है जिसका द्रव्यमान तो इलेक्ट्रॉन के बराबर होता किंतु आवेश ऋण की बजाए धन होता है।

प्रकृति में द्रव्य तथा प्रतिद्रव्य कण सदैव जोड़े में ही उत्पन्न होते हैं तथा जब भी आपस में इनका अंतर्मिलन होता है तो द्रव्य समाप्त हो जाता है तथा इसके स्थान पर ऊर्जा उत्पन्न होती है। अर्थात द्रव्य तथा प्रतिद्रव्य के कण आपस में मिल कर एक दूसरे को समाप्त कर देते हैं तथा ऊर्जा में तब्दील हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि महाविस्फोट के पहले सेकंड के पहले कुछ अंशों में तप्त व घनीभूत ब्रह्मांड के कण व प्रतिकण कई बार बने होंगे तथा कई बार मिटे भी होंगे। जब द्रव्य तथा प्रतिद्रव्य बने व नष्ट हो गए तो ब्रह्मांड केवल असीम ऊर्जा का भंडार मात्र रहा होगा। कालान्तर में इस ऊर्जा से ही पहले द्रव्य कणों का, फिर परमाणुओं का तथा यौगिकों का निर्माण हुआ होगा।

प्रतिकणों के मामले में अभी तक वैज्ञानिक इलेक्ट्रॉन - पॉजिट्रॉन, प्रोटोन - एंटीप्रोटोन, न्यूट्रिनो - एंटीन्यूट्रिनो जैसे कई कणों तथा प्रतिकणों की खोज कर पाए हैं तथा उन्होंने प्रतिपरमाणुओं की भी खोज करने का प्रयास किया हैं। उदाहरण के तौर पर फ्रांस तथा स्विटजरलैंड के मध्य स्थित " यूरोपियन काउंसिल फॉर न्यूक्लियर रिसर्च " (CERN) की प्रयोगशाला में सन् 1995 में हाइड्रोजन के प्रतिपरमाणु के रूप में " प्रतिहाइड्रोजन " के निर्माण में 'क्षणिक' सफलता प्राप्त की थी। यह एक बहुत बड़ी बात थी किंतु इस सफलता को क्षणिक सफलता इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि इस " प्रतिहाइड्रॉजन " का जीवनकाल एक सेकंड के करोड़वें भाग से भी कम था। हाइड्रॉजन का यह प्रतिपरमाणु प्रकाश की गति से चलता हुआ केवल 10 मीटर की दूरी तय करके ही नष्ट हो गया। इस प्रतिहाइड्रॉजन का निर्माण अत्यंत कठिन था जिसे यहाँ के वैज्ञानिकों ने कर दिखाया।
अब जरा हाइड्रॉजन की संरचना देखें जिसमें एक प्रोटोन के चारो ओर एक इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाता है। इस आधार पर 'प्रतिहाइड्रॉजन' वह परमाणु होगा जिसमें एक प्रतिप्रोटोन (Antiproton) के चारो ओर एक पॉजिट्रॉन ( प्रतिइलेक्ट्रॉन ) चक्कर लगाता है।

सन् 2011 में CERN के वैज्ञानिकों को ही एक बड़ी सफलता तब मिली जब यहाँ के ALPHA नामक एक प्रयोग में " प्रतिहाइड्रॉजन " को लगभग 1000 सेकंड तक पकड़े रखा गया। अब यहाँ के वैज्ञानिक बड़ी मात्रा में प्रतिहाइड्रॉजन उत्पन्न करने तथा इसके गुणों व उपयोग का अध्ययन करने का प्रयास कर रहे हैं। आशा है, इन प्रयोगों से अन्य प्रतिद्रव्य परमाणुओं के अध्ययन में भी सहायता मिलेगी। CERN ब्रह्मांड की उत्पत्ति के संबंध में खोज करने की दिशा में कार्यरत है तथा यहाँ स्थित LHC (लार्ज हेड्रॉन कोलाईडर ) नामक मशीन में ही वैज्ञानिकों ने ब्रह्म कण (Higgs Boson) को खोजने में सफलता प्राप्त की थी। )

इस संबंध में अधिक विवरण इस लिंक पर है-
http://home.web.cern.ch/about/physics/search-antimatter
(इस आलेख पर आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है।)

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