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Friday, January 3, 2014

***एक सच्चे शिक्षक चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव भी है भारत रत्न***


 
देश के विज्ञान जगत के लिए यह गौरव की बात है कि भारत के विश्व प्रसिद्ध रसायन वैज्ञानिक व शिक्षक प्रोफेसर सीएनआर राव को देश के सबसे बड़े सम्मान 'भारत रत्न' के लिए चुना गया है।

सामान्य परिचय-

प्रखर वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव का पूरा नाम 'चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव' है। डॉ. राव का जन्म 30 जून 1934 को बंगलुरू में हुआ। उनके पिता का नाम हनुमन्था राव तथा माँ का नाम नागम्मा नागेसा था। वह अपने माता पिता की इकलौती संतान हैं। उनके पिता ने उन्हें अंग्रेजी बोलने तथा समग्र अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया। स्कूली दिनों से ही उनका रुझान रसायनशास्त्र की ओर हो गया तथा इसी को उन्होंने कैरियर के रूप में अपनाया।
सन् 1947 में राव ने अपनी हाईस्कूल परीक्षा पास की तथा विज्ञान में गहरी रुचि के कारण बंगलुरू के सेंट्रल कॉलेज में प्रवेश लिया। महज 17 की उम्र में ही उन्होंने 1951 बीएससी परीक्षा पास कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।
बीएससी के बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एमएससी कोर्स में प्रवेश लिया। एमएससी के दौरान उन्हें विश्व प्रसिद्ध रसायन वैज्ञानिक पॉलिंग की पुस्तक- 'नेचर ऑफ दी केमिकल बांड्स' प्रथम बार पढ़ने का अवसर मिला। इस पुस्तक ने राव के मन में अणुओं के संसार के प्रति गहरी उत्सुकता जगा दी तथा उन्हें अणुओं से संबंधित अनुसंधान की ओर प्रेरित किया। श्री राव की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें कई विश्वविद्यालयों जैसे एमआईटी, कोलंबिया वि.वि. व पर्ड्यू विश्वविद्यालय में पूर्ण आर्थिक सहयोग के साथ रिसर्च के प्रस्ताव थे। राव ने पर्ड्यू को चुना जहाँ उन्होंने मात्र 9 महीनों के रिकॉर्ड समय में अपनी पीएचडी पूरी की। उनकी देशभक्ति ही थी कि वे इसके बाद वो विदेश में रुके नहीं बल्कि उन्होंने भारतभूमि को ही अपना कार्यक्षेत्र बनाने का निश्चय किया तथा बंगलुरू लौट आए। यहाँ उन्होंने मात्र 500 रुपए प्रतिमाह पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में लेक्चरर की नौकरी प्रारंभ की। प्रोफेसर राव को दुनिया भर में ठोस अवस्था एवं द्रव्य रसायन (Solid State and Material Chemistry) तथा नैनो मेटेरियल में विशेषज्ञता व मौलिक अनुसंधान के लिए जाना जाता है।

डॉ सीएनआर राव विज्ञान तथा वैज्ञानिक अनुसंधान पर लगभग 1400 से अधिक शोध पत्र और 45 पुस्तकें लिख चुके हैं। प्रोफेसर राव का नाम दुनिया भर की विज्ञान अकादमियों में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रोफेसर राव सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के पश्चात तीसरे ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारत रत्न सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। डॉ. राव ने रसायनशास्त्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान करने के साथ-साथ देश की वैज्ञानिक नीतियों को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। वे वर्तमान में प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं। प्रोफेसर राव वर्ष 1985 में पहली बार और वर्ष 2005 में दूसरी बार इस समिति के अध्यक्ष चुने जा चुके हैं।

देश के सबसे ज्यादा बौद्धिक वैज्ञानिक भी है राव-

प्रोफेसर राव देश के एकमात्र वैज्ञानिक हैं जिनका एच-इंडेक्स 100 है। एच-इंडेक्स वैज्ञानिकों की प्रतिभा आँकने का एक पैमाना है जो उसके वैज्ञानिक अनुसंधानों की संख्या तथा उनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा के आधार पर तय किया जाता है।

कई पुरस्कार मिले हैं राव को-

उन्होंने पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना की मूलभूत समझ विकसित करने में अहम शोध कार्यों को अंजाम दिया है जिनके लिए उन्हें कई पुरस्कार देकर मान दिया गया।
> 1964 में उन्हें इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज का सदस्य नामित किया गया।
>1967 में फैराडे सोसाइटी ऑफ इंग्लैंड ने राव को मार्लो मेडल दिया।
>उन्हें वर्ष 1968 में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पुरस्कार "शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार" से सम्मानित किया गया।
>इसके अलावा 1988 में जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार तथा 1999 में इंडियन साइंस कांग्रेस के शताब्दी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
> भारत सरकार ने उन्हें 1974 में पदमश्री और 1985 में पदमविभूषण से सम्मानित किया।
> डॉ. राव को कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक रत्न की उपाधि से भी नवाजा।
> डॉ राव को विज्ञान शिक्षा जगत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही सम्मान है तथा उन्हें कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों एवं विज्ञान अकादमियों का सदस्य बनाया गया है व फेलोशिप प्रदान की गई है।
वे इंटरनेशनल सेंटर ऑफ मैटिरियल साइंस के निदेशक रह चुके हैं तथा "लिनस पॉलिंग प्रोफेसर" के रूप में भी सम्मानित हो चुके हैं।
> प्रो राव के अनुसंधानों को संपूर्ण विश्व के वैज्ञानिक जगत में गहरे सम्मान से देखा जाता है तभी तो दुनिया भर के विश्वविद्यालयों ने उन्हें 60 मानद पीएचडी डिग्रियां प्रदान की है और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में वह एक आइकन की तरह देखे जाते हैं।

ठोस अवस्था एवं द्रव्य रसायन तथा नैनो मेटेरियल के विशेषज्ञ हैं राव-

प्रोफेसर राव ठोस अवस्था एवं द्रव्य रसायन (Solid State and Material Chemistry) तथा नैनो मेटेरियल में अपनी विशेषज्ञता की वजह से जाने जाते हैं। उन्होंने पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच बुनियादी समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है। अपने 54 वर्षों के लंबे सक्रिय काल में उन्होंने हजारों की संख्या में शोध कार्य किए हैं जो निःसंदेह वंदनीय हैं।

एक सच्चे शिक्षक है राव-

उन्होंने भारत रत्न सम्मान को अपनी पत्नी, परिवार, अपने बच्चों के अलावा अपने छात्र-छात्राओं को समर्पित किया है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके बारे में कहा कि डॉ राव ने देश के वैज्ञानिक अनुसंधान तथा विज्ञान शिक्षा के लिए 54 सालों तक अत्यंत महत्वपूर्ण काम किया है।

1 comment:

  1. भारत रत्न राव साहब पर सार्थक जानकारी

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