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Friday, September 6, 2013

***माध्यमिक स्तर पर (कक्षा 9 और कक्षा 10) में विज्ञान शिक्षण-***








उच्च प्राथमिक स्तर पर विज्ञान को एक संकाय के रूप में पढ़ाए जाने की जो शुरुआत हुई, उसे इस स्तर पर ज्यादा मजबूत करना चाहिए। अब पाठ्यचर्या में सिद्धांत, अवधारणाएँ व विज्ञान के नियम लाए जा सकते हैं, लेकिन बल इन्हें सीखने पर होना चाहिए, न कि केवल परिभाषाओं को रटे जाने पर। विषय-वस्तु के स्तर पर वर्तमान पाठ्यचर्या माध्यमिक स्तर के लिए ठीक ही है, लेकिन पाठ्यचर्या-बोझ को कम करना अत्यंत जरूरी है, ताकि बच्चों के पास अन्य गतिविधियों और पाठ्येतर कार्यकलापों के लिए समय व ऊर्जा बच सके।
इस स्तर पर वे सिद्धांत लाए जाने चाहिए जो सहज सीधे अनुभव जगत से नहीं जुड़े हों। चूँकि सभी परिघटनाएँ सीधे अवलोकन योग्य नहीं होतीं, इसलिए विज्ञान अनुमान और व्याख्याओं का भी सहारा लेता है। जैसे परमाणुओं के होने व उनके लक्षणों को जानने के लिए या मानव-विकास की परिघटना को समझने के लिए अनुमान द्वारा ही क्रमवार, लेकिन तर्क से जुड़े, कथनों-निष्कर्षों का सहारा लिया जाता है। इस स्तर तक बच्चे में वैज्ञानिक तथ्यों की ज्ञान-मीमांसीय परख कर सकने की क्षमता विकसित हो जानी चाहिए। सैद्धांतिक अवधारणाओं को जानने या उनकी सत्यता को जाँच करने के लिए प्रयोग, ख़ासकर मात्रात्मक मापन, इस स्तर पर पाठ्यचर्या का अहम हिस्सा होना चाहिए। इस स्तर पर जो तकनीक-जनित मॉड्यूल्स परिचित कराए जाएँ, उन्हें पूर्वस्तर के मॉड्यूल्स का डिजाइन, स्कूल-कार्यशाला के माध्यम से उनको कार्यान्वित करके देखना और संभव हो तो इसमें उनकी मात्रात्मक-गुणात्मक क्षमता की जाँच शामिल की जा सकती हैं। प्रयोगों को पाठ्यचर्या का हिस्सा होना चाहिए, ताकि उनके प्रति उदासीन नहीं रहा जा सके। हालाँकि इस हिस्से का मूल्यांकन आंतरिक ही होना चाहिए। सैद्धांतिक लिखित परीक्षा, जिसमें दसवीं की बोर्ड परीक्षा भी शामिल है, में कुछ प्रश्न प्रयोग/तकनीकी मॉड्यूल पर आधरित होने चाहिए। सह पाठ्यचर्यात्मक कार्यकलापों में भागीदारी को महत्त्वपूर्ण और एकसमान अनिवार्यता मिलनी चाहिए। इसके तहत स्थानीय स्तर के मुद्दों पर परियोजना कार्य (शिक्षकों से परामर्श लेकर) लिए जा सकते हैं, उनका विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाधान ढूंढ़ना शामिल है।
उपरोक्त सभी आयामों को पाठ्यचर्या में जोड़कर एकरूप किया जाए, इसे रचनात्मक ढंग से ही सोचना चाहिए। उच्च प्राथमिक स्तर व माध्यमिक स्तर की पाठ्यचर्याओं में क्षैतिज एकता व उर्ध्वाधर निरंतरता होनी चाहिए।

-विज्ञान शिक्षण राष्ट्रीय फोकस समूह का आधार पत्र

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