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Friday, March 16, 2012

बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी

  मित्रों अभी कल की ही तो बात है हमारे एक सृजनशील साथी श्री प्रकाश जोशी ने एक फोटो फेस बुक पर शेयर किया | ये फोटो एक विमोचन समारोह का था| मैंने उस फोटो को CREATIVE TEACHER फेस बुक समूह में शेयर कर दिया | उसके बाद मैंने सोचा कि क्यों न यही पर आने वाले कमेन्ट के माध्यम से ही इस शख्सियत का परिचय समूह के दूसरे साथियो से हो जाए | बस फिर क्या हमने एक कमेन्ट दिया कि इनके बारे में जानकारी दीजिए | सब से पहले मनोहर सिंह जी ने मोर्चा संभाला और कुछ जानकारी दी फिर प्रकाश जी ने जिम्मा सम्हाला और उनके बारे में सारी जानकारी एकत्रित कर के कमेन्ट के माध्यम से लगा दी | देखो मित्रों मैंने यहाँ पर कितनी लंबी बात कर दी और उस शख्शियत का नाम ही नहीं लिया तो मित्रों वो शख्सियत डॉ जुगनू है जो पेशे से अध्यापक है |
अब उनके बारे में जो प्रकाश जी ने कहा उसे पद कर मुझे बहुत अच्छा लगा ये गर्व भी हुआ कि  CREATIVE TEACHER फेसबुक समूह से जुदा हूँ उस में ऐसे लोग भी हैं |
प्रकाश जी ने उनके बारे में जानकारी जुटा कर जो शेयर किया वो इस प्रकार है -


Pramod ji and all Friends, I feel glad to give introduction of a great creative teacher Dr. Shri Krishna Jugnu. Dr. Jugnu hails from Chittor, presently resides in Udaipur in Rajasthan and has studied and researched extensively on varied subjects like history, archeology, art, architecture, education, religion and culture. He is a teacher in udaipur district. His hundreds of articles on art and culture is published in various magzines and news papers. He is a auther of about more than 50 books on history, archeology, art, architecture, education, religion, Jyotish, Vastu shastra and culture. I read so many articles of mr. jugnu in Dainik Bhaskar and Rajasthan Patrika on art and culture of Rajasthan.
मित्रों डॉ श्रीकृष्ण जी का कुछ और विस्तृत परिचय प्रदान कर रहा हूँ-

श्रीकृष्ण ‘जुगनू’
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिलान्तर्गत आकोला में 2 अक्टूबर, 1964 ई. को जन्म।
स्वशिक्षित (PRIVATE STUDY):- अधिस्नातक (प्राचीन भारतीय इतिहास, हिन्दी एवं अंग्रेजी)
पी.एच.डी. :- मेवाड़ प्रदेश का हीड़ साहित्य (राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर)
अन्य डिग्री:- पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं शिक्षा स्नातक, (सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर) एवं श्रव्य-दृश्य मीडिया में दक्ष।

इतिहास-पुरातत्त्व, शिल्प, कला, स्थापत्य, शिक्षा धर्म, ज्योतिष, वास्तु व संस्कृति जैसे विषयों के अध्ययन-अध्यापन, अनुसंधान और लेखन में गहरी रुचि तथा एतद् विषयक स्थलों का यथासम्भव टोही भ्रमण में गहन रुचि। इन्हीं विषयों पर वर्ष 1978 से अद्यावधि छह हजार से अधिक आलेखों का देश के प्रतिष्ठित पत्रों-पत्रिकाओं में सचित्र प्रकाशन। देशी-विदेशी हस्तशिल्पियों, कला प्रेमियों, राजनेताओं व समाज सुधारकों के भावात्मक साक्षात्कारों का संग्रह और प्रकाशन। दर्जनों शिलालेखों, सुरह लेखों, ताम्रपत्रों, पट्टों, पाण्डुलिपियों आदि का अध्ययन, मूलपाठों का प्रकाशन और अनुवाद।

राकेट (बाल मासिक) रङ्गायन (लोक संस्कृति विषयक त्रैमासिक) सहित एक दर्जन स्मारिकाओं का सम्पादन। राजस्थान का लोक पहनावा (मानव संसाधन विकास मंत्रालय के लिए शोध सर्वेक्षण), भलाभाई-बुराभाई (राजस्थानी लोककथाएँ), मेवाड़ के लोकनृत्य, विवाह बन्दनवाल (मेवाड़ के विवाह गीत), चितचोर चित्तोड़; दर्शनीय उदयपुर व मेवाड़ के मन्दिर, मन्दिर श्री अम्बामाताजी उदयपुर तथा लोकशक्तिपीठ आसावरामाता, मेवाड़ की जनजातीय व लोक संस्कृति, कला की कालकथा, वास्तु एवं शिलाचयन आदि कृतियाँ।
दोस्तों डॉ श्रीकृष्ण जी हमारे प्राचीन ग्रंथों के संबंध में कार्य कर रहे हैं। अब में आपको उन ग्रंथों की सूची से अवगत करा रहा हूँ जिनकी रचना डॉ श्रीकृष्ण जी ने प्राचीन संस्कृत ग्रंथों को आधार मान कर की है। ये ग्रन्थ निम्नांकित हैं :-
राज्याभिषेक पद्धति (चक्रपाणिमिश्र),
मुहूर्तमाला (चक्रपाणिमिश्र), विश्ववल्लभ-वृक्षायुर्वेद (चक्रपाणिमिश्र), ज्योतिषरत्नमाला (श्रीपतिभट्टाचार्य), वृक्षायुर्वेद (विद्यावर्रेण्यसुरपाल), मनुष्यालयचन्द्रिका (नीलकण्ठमूसत), वास्तुसारमण्डनम् (सूत्रधारमण्डन),
आयतत्त्वम् (सूत्रधारमण्डनम्), चित्रलक्षणम् (नग्रजित्), राजावल्लभवास्तुशास्त्रम् (सूत्रधारमण्डन), देवतामूर्तिप्रकरणम्-रूपमण्डनम् (सूत्रधारमण्डन), वास्तुमण्डनम् (सूत्रधारमण्डन), कलानीधि (सूत्रधारगोविन्द), वास्तुमञ्जरी (सूत्रधारनाथा), प्रासादमण्डनम् (सूत्रधारमण्डन), मुहूतकल्पद्रुम (विट्ठुलदीक्षित), मुहूर्तदीपक (महादेव दैवज्ञ), शिल्पशास्त्रम् (बउरीमहाराणा), वास्तुविद्या (अज्ञातकर्तृत), योगगीता (मुनिब्रह्मानन्द), कलाविलास,
मानसार, काश्यपशिल्पम्, अपराजितापृच्छा, वास्तुयुक्ति, राजमार्तण्ड, वत्थुसारपयरणम्, समराङ्गणसूत्रधार, ज्ञानप्रकाशदीपार्णव, मुहूर्तसर्वस्व, ज्योतिषवृत्तशतम्, पञ्चसिद्धान्तिका, प्रमाणमञ्जरी, देवालयचन्द्रिका आदि। 
तो मित्रों ये हैं हमारे सृजनशील शिक्षक डॉ श्रीकृष्ण जुगनू। इनके बारे में बहुत थोड़ा कहा है. बहुत कुछ कहा जा सकता है इनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर

मित्रों कल्पना कीजिये कि इतना लिखने के बाद भी जिस शख्स के बारे में अंत में प्रकाश जी को ये लिखना पड़ा कि इनके बारे में बहुत थोड़ा कहा है बहुत कुछ कहा जा सकता है इनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर तब आप क्या कहेंगे | हम तो यही कहेंगे कि इश्वर इनकी इस प्रतिभा को और बढ़ाए |

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