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Thursday, June 16, 2011

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान -परिचय


भारत सरकार व मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा संबंधी सुधार व गति देने हेतु केन्द्रीय शिक्षा परामर्श मण्डल(सीएबीई) द्वारा 2005 में माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने और गुणात्मक विकास की अभिशंषा की । दसवी पंचवर्षीय योजना के शिक्षा संबंधी मध्यवर्ती मूल्यांकन प्रतिवेदन में वर्णित किया गया कि सर्व शिक्षा अभियान की सफलताओं को ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा को एक मिशन के रूप में लिया जाना चाहिए। इसी संदर्भ में स्वतत्रता दिवस 2007 को माननीय प्रधान मंत्री महोदय द्वारा दिए गए उद्बोधन में भी कहा कि हम ‘‘ माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण के लक्ष्य को निर्धारित कर रहे है।‘‘ इन्ही संदर्भों में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का सूत्रपात हुआ।
भारत में 14 से 18 आयुवर्ग के समूह का अनपात भारत क कुल जनसंख्या का 10 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तरीय शैक्षिक सांख्यिकी प्रतिवेदन 2005-06 के अनुसार देश के माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 1,06,084 तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 53,619 है इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या 3.84 करोड़ थी। जिससे उतरोत्तर वृद्धि हो रही है। राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए इस आयु वर्ग के समूह पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की गई तथा इस समूह को शत्प्रतिशत् माध्यमिक शिक्षा से जोड़ने की परिणिति के रूप में यह अभियान ( राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) को प्रारम्भिक चरण के RMSA रूप में आरम्भ किया गया

इस प्रारूप को दस अध्याय में रखा गया है। जिसके दस अध्याय निम्न प्रकार से है-

1. माध्यमिक स्तर पर सार्वजनीकरण की प्राप्ति एवं गुणवत्ता सुुधार प्राप्ति की योजना।

2. माध्यमिक स्तर हेतु उपागम व व्यह रचना।

3. नियोजन, मूल्यांकन और वित्तीय पक्ष

4. विद्यालय का आधार भूत ढांचा , अधिगम स्रोत, शिक्षक अन्य

5. माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार

6. विशिष्ठ फोकस समूह

7. विद्यालय सुविधाएं एवं अन्य निर्माण कार्य का उन्नयन

8. योजना के क्रियान्वित करने और समसामयिक प्रयासों से जोड़ने हेतु प्रबंधकीय ढ़ाचा।

9. विभिन्न स्तरों पर प्रबोधन Monitoring मूल्यांकन एवं शोध

10. पारदर्शिता एवं जवाबदेही के संबंध में राज्य सराकारें की भूमिका

औचित्य/ आवश्यकता

1 आर्थिक उदारीकरण एवं वैश्वीकरण के कारण हमारी शिक्षा विशेषकर माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता विश्व स्तरीय हो, यह आवश्यकता हो जाता है।

2 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा ,सहभागिता एवं सफलता योगय बनाने हेतु माध्यमिक शिक्षा के सुदृढ़करण हेतु शैक्षिक गुणवत्ता की ओर प्रयास करने की दृष्टि से।

3 वर्तमान परिपेक्ष्य में माध्यमिक स्तर पर अध्ययनरत विद्यार्थियों को व्यावसायिक ज्ञान तथा कौशलों के अवसरों को सुनिश्चित करने की दृष्टि से।

4 विश्व के अधिकांश विकसित देशों की तरह भारत में माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण की आवश्यकता अनुभुत की गई।

5 आर्थिक वृद्धि में मानवीय संसाधनों को जुटाने की दृष्टि से विज्ञान, वाणिज्य और व्यावसायिक संकायों में लड़कों के साथ-साथ विशेषकर छात्राओं, एससी,, एसटी,, ओबीसी के नामांकन को बढ़ावा देने की आवश्यकता की दृष्टि से।

6 विद्यार्थियों को सुनागरिक बनाने एवं विश्व स्तरीय कार्य करने योग्य बनाने हेतु कक्षा 8 वीं तक की पढ़ाई को अपर्याप्त समझा जाने के फलस्वरूप।

7 सर्व शिक्षा अभियान के सफल संचालन एवं उपलब्धि की प्रेरणा भी माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण करने का कारण बनी।

लक्ष्य तथा उद्देश्य-
माध्यमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण की चुनौतीपूर्ण अवधारणा को माध्यमिक शिक्षा की सर्व सुलभता, समानता, सामाजिक न्याय तथा प्रासंगिक पाठ्यक्रम संरचना संदर्भ में अवगत करवाने की आवश्यकता है। सामान्य विद्यालय अवधारणा(कामन स्कूल) को प्रोत्साहित करना, सभी प्रकार के स्कूलों सथा सरकारी, अनुदानित, गैर अनुदानित विद्यालयों के सहयोग से माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण का लक्ष्य है।


उपर्युक्त लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु उदृदेश्य निम्नांकित है -

1. माध्यमिक स्तर हेतु निर्धारित किये गये मानदण्डानुसार सभी प्रकार के विद्यालयों में भौतिक सुविधाऐं, स्टाफ की पूर्ति को सुनिश्चित करना।

2. माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की पहुँच हेतु सुविधाएँ प्रदान करना।

3. लिंग, आर्थिक , सामाजिक स्तर, विकलांगता के आधार पर कोई विद्यार्थी माध्यमिक शिक्षा से वंचित न रहे इसे सुनिश्चित करना।

4. माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के परिणाम स्वरूप विद्यार्थियों में बौद्धिक , सामाजिक व सांस्कृतिक अधिगम में वद्धि हो।

5. सभी विद्यार्थी गुणवतापूर्ण माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करे। इसे सुनिश्चत करना।

6. प्रत्येक 5 किमी पर माध्यमिक तथा 7-10 किमी पर उच्च माध्यमिक विद्यालय उपलब्ध कराना।

7. 2017 तक माध्यमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण को प्राप्त करने का लक्ष्य तय करना तथा 2020 तक माध्यमिक शिक्षा में शत् प्रतिशत ठहराव सुनिश्चित करना।

8. समाज के विशेषवर्ग विशेषकर लड़कियों तथा कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों, दुर्गम व ग्रामीण स्थानों के प्रवर्जित विद्यार्थियों को कम खर्चीली माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध करवाना।

9. समान सकूल व्यवस्था में उपर्युक्त उद्देश्यों को प्राप्त करना।

व्यूह रचना-

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अन्तर्गत माध्यमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण में संख्यात्मक, गुणात्मक, चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर के अनुसार अतिरिक्त विद्यालय खोलना, भवन, कक्षाओं का निर्माण, अध्यापकों की उपलब्धता तथा अन्य आधार भूत सुविधाएंें प्रदान करना।

गतिविधियाँः-

1 संसाधन विहीन विद्यालयों की पहचान।

2 मानदण्डानुसार उच्च प्राथमिक विद्यालयों को माध्यमिक विद्यालयों में क्रमोन्नत करना।

3 शैक्षिक गुणवत्ता हेतु सूक्ष्म नियोजन

3 NCF 2005 के परिप्रेक्ष्य में पाठ्यक्रमों की पुनः समीक्षा।

4 शैक्षिक प्रशासन में ई-गर्वनर्स पर बल।

5 विद्यालयों में आवश्यकतानुसार आधारीाूत ढ़ाचा बनाने, मरम्मत, रखरखाव हेतु वित्तीय सहायता।
6 विद्यालय में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु, प्रयोगशालाओं के विकास हेतु वित्तीय सहायता।

7 NACA तथा MHRD के माध्यम से एड्स/HIV जागरूकता हेतु कार्यक्रमों का संचालन।

8 विद्यालयों में निर्देशन व परामर्श संबंधी कार्यक्रम।

9 विद्यालयों में अधिगम स्रोत केन्द्रों की स्थापना।

10 शिक्षा संबंधी कार्यो में जन हित सहभागिता एवं निजी सहभगिता संबंधी पक्षों पर बल।

11विशिष्ट समूहों पर विशेष ध्यान।

12 दूरस्थ शिक्षा एवं खूले विद्यालयों को बढ़ावा।

13 शैक्षिक शोध संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना।

14 प्रबोधन।

प्रस्तुति -प्रकाश जोशी
प्राध्यापक भौतिक विज्ञानं

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