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Tuesday, March 29, 2011

जब बाड़ ही खेत को खाने लगे ................

मित्रों बहुत दिनों बाड़ एक बार फिर आप से खुच चर्चा करने की इच्छा हुई है | कभी कभी कुछ ऐसा घाट जाता है की दिल भरी हो जाता है |शायद आप का भी हुआ होगा क्यों की मेरा मानना है की हार संवेदनशील शिक्षक आजकल की परिस्थियो से विचलित और बेचैन जरूर है | आज शिक्षा ही नहीं जीवन के हार भाग में गुणवता में गिरावट आरही है | कल की तो बात है सवाई माधोपुर के बोर्ड के संग्रहण केंद्र पर जो कुछ हुआ वो हमारे लिए बेचेनी पैदा करता है | किस तरीके से बोर्ड की तमाम व्यवस्थाओ को धता बता कर लोग गोरख धंधा कर रहे हैं | बात इस गोरख धंधे की नहीं बात शिक्षा की अस्मिता की है | बात शिक्षा में बढ़ रहे भ्रष्ट आचरण की है | इस बार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा व्यवस्थाओ मैं आमूलचूल परिवर्तन किए जिनका सकारत्मक परिणाम हमारे सामने आये भी हैं | इस बार कही से पेपर आउट होने की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है | निश्चित रूप से बोर्ड द्वारा किए गए सुधारों का स्वागत होना चाहिए | बोर्ड ने सरकारी स्कुलो को केंद्र बनाया और सरकारी स्कूलों के जागरूक शिक्षको ने तमाम विपरीत परिस्थियो के बावजूद की परीक्षा के इस यज्ञ में अपना सर्वस्व लगा दिया | क्या ये घटना उन सभी शिक्षको की मेहनत पर पानी नहीं फेर गई | क्या ऐसी घटना संवेदनशील शिक्षक को झाक्झोरने के लिए पर्याप्त नहीं है | मित्रो शिक्षा पर चारो और से हमले हो रहे है |निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के मनमानी शिक्षा को गर्त मैं धकेल रही है | आज जब अख़बार मैं ये पढ़ा की इस घटना में केवल खुद का पास होना ही नहीं छिपा है वरन दुसरो के सही प्रश्न काट कर उन को पीछे धकेलने की मंशा भी छुपी है |

मेरा इस चर्चा का कारन भी दुसरो को पीछे धकेलने वाली मंशा के पहलुओं पर काह्र्चा करना है | मेरी नज़र में कही हम ऐसी व्यवस्था का निर्माण तो नहीं कर रहे है जहाँ चूहा दौड़ बहुत महत्वपूर्ण हो गई है | ऐसा नहीं लगता की गला काट स्पर्धा के चलते समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है | हालाँकि शिक्षक का दोष नहीं है तमाम व्यवस्था भ्रष्ट आचरण से भरी हुई है |पर फिर भी जब चारो और विपरीत स्थितियां  दिखाई दे रही हो तब अच्छा सोचने वाले लोग अगर किसी और आशा की दृष्टि से देखते है तो वो हम ही हैं दोस्तों | भले ही ये समाज हुमे वो दर्जा नहीं देता पर फिर भी उसकी उम्मीद हम से ही है | मैं ये भी मानता हूँ की जब भी शिक्षा में सुधार की बात चलती है तो वो शिक्षको में सुधार पर जाकर समाप्त हो जाती है | बहरहाल जो भी बोर्ड परीक्षा में हुए इस कांड को जघन्य अपराध की संज्ञा दूंगा | क्योंकि इस जरा-से लालच ने हजारों लाखो विद्यार्थियो के विश्वास को ठेस पहुंचाई है | ये अपराध कदापि क्षम्य नहीं है |
मित्रो ऐसी तमाम परिस्थितयो में हमारी जिम्मेवारी और बढ़ जाती है ,अब हमे और जायदा चोकस रहना होगा | परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखना हमारा कर्तव्य भी हे और जिम्मेवारी भी | हमारी चुपी शिक्षा में भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा देगी | हमें परीक्षा में जहाँ कहीं भी अनैतिकता दिखे उस के खिलाफ खड़ा होना होगा | हमें आगे बढ़ कर शिक्षा को सम्हलना होगा| हमें हमारे विद्यार्थियो को अनावश्यक चूहा दोड़ के लिए अनैतिक आचरण को करने से रोकना होगा |हमें उन्हें नैतिकता का पाठ पढना ही होगा |
इस बार के लिए इतना ही....
शेष शुभ हो....
प्रमोद कुमार चमोली

2 comments:

  1. naitik utthan karne k liye ek ABHIYAN CHALANE KI PARAM AVASHYKTA H.Vaise bhang to poore me ghuli h.aap aur hum milkar shuruat karte h.

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  2. I do appreciate your thoughts and efforts. Keep writing.

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