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Friday, February 25, 2011

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुरूप होगा राजस्थान की भी पाठ्यचर्या

राज्य सरकार द्वारा एनसीईआरटी के नेशनल कॅरिकुलम फ्रेमवर्क - NCF अर्थात राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 की अनुशंसा के बाद देश भर में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की कवायद विभिन्न राज्यों ने शुरू कर दी। राजस्थान में भी राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में पिछले शिक्षा सत्र में ही कार्य आरंभ कर दिया। इसके प्रथम चरण में राज्य में कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें लागू कर दी गई। यह भी निर्णय किया गया कि अगले सत्र में कक्षा आठवीं, दसवीं तथा बारहवीं में भी एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें लागू कर दी जाएगी। इसके साथ राज्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर राजस्थान से संबंधित ज्ञान से राज्य के विद्यार्थियों को अवगत कराने के लिए राज्य में 'राजस्थान अध्ययन' नामक पाठ्यपुस्तक भी लागू की गई। इसके अलावा सरकार ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के अनुरूप राज्य की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं के संदर्भ में स्कूली शिक्षाक्रम का निर्धारण करने एवं शिक्षा में व्यापक बदलाव करने के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के समन्वय में एक 21 सदस्यीय 'राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा समिति' {State Curriculum Framework committe} का भी गठन किया और इसे राज्य की पाठ्यचर्या की रूपरेखा तैयार करने का जिम्मा दिया गया। राजस्थान मा. शि.बोर्ड को इसके लिए नोडल एजेंसी है। समिति में माध्यमिक व प्रारंभिक शिक्षा के निदेशक, एसआईईआरटी के निदेशक, राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल के सचिव तथा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों सहित कुल 21 सदस्य शामिल हैं।

समिति द्वारा किया जा रहा है व्यापक विचार विमर्श -

समिति के डॉ. पी. सी. व्यास, पूर्व अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान ने गुरुवार दिनांक 24 फरवरी को हुई प्रेस वार्ता में बताया कि पाठ्यक्रम की विषयवस्तु, पढ़ाने के तरीकों तथा शिक्षा से जुड़ी विभिन्न छोटी बड़ी नीतियों का निर्धारण करने के लिए संभाग स्तर बैठकें कर विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षिक अभिकरणों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों आदि से विचार आमंत्रित किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में उदयपुर में हुई संभाग स्तरीय बैठक में संबंधित विशेषज्ञों ने उपयोगी सुझाव दिए हैं कि शिक्षण संस्थाओं में शिक्षकों का अधिक से अधिक ठहराव हो, शिक्षकों की सुविधादाता के रूप में भूमिका हो, विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जाए तथा व्यवसायिक उन्नयन के लिए सेवारत प्रशिक्षणों की उपादेयता को सुनिश्चित किया जाए।
इसके अतिरिक्त समग्र एवं सतत मूल्यांकन, सभी के लिए विज्ञान, विद्यार्थी को केंद्र में रखकर ज्ञान सृजन हेतु सीखने के लिए विभिन्न गतिविधियों का सृजन करने पर भी बैठक में चर्चा की गई।
डॉ. व्यास के अनुसार इस समिति ने अपनी रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। खबर यह है कि इस समिति की अनुशंसा के अनुसार सीबीएसई के बाद राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भी ग्रेडिंग सिस्टम की तैयारी कर रहा है। आने वाले कुछ वर्षो में ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की संभावना है। डॉ. व्यास ने इस संबंध में बताया कि समिति के पास आए सुझावों के बाद तय किया गया है कि स्कूल स्तर की परीक्षाओं में ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया जाए, लेकिन वार्षिक परीक्षाओं में अंक आधारित प्रणाली को ही अपनाया जाए। उसके कुछ समय बाद वार्षिक परीक्षाओं में भी ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया जाए। उन्होंने संभावना व्यक्त की है कि आगामी कुछ वर्षो में राजस्थान बोर्ड में भी ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। लेकिन डॉ. व्यास ने यह भी कहा कि ग्रेडिंग सिस्टम अचानक से नहीं थोपा जा सकता। इसके लिए वातावरण निर्माण की आवश्यकता है।

मित्रों ! राज्य के शिक्षा जगत में परिवर्तन हुआ है और आगामी दिनों में व्यापक स्तर पर बदलाव होने वाला है। इसी संदर्भ में हमें भी व्यापक विचार विमर्श करना होगा ताकि हम मानसिक रूप से इसके लिए तैयार हो सके और कहीं इस प्रक्रिया में कुछ गलत हो रहा है तो समय रहते सुझाव दिए जा सके व चेताया जा सके। यह अच्छी बात है कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड आगे आकर सुझाव आमंत्रित भी कर रहा है। यदि आपके मन में कोई सुझाव हो तो आप इस ब्लॉग को भी मंच के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। आपके बहुमूल्य सुझावों को हम बोर्ड व राज्य सरकार तक भिजवाने का प्रयास करेंगे।

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